राजस्थान के जयपुर-जोधपुर रेलमार्ग पर भारत का पहला हाई-स्पीड रेलवे ट्रायल ट्रैक बनाया जा रहा है। यह ट्रैक 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर बुलेट ट्रेन और हाई-स्पीड कोच का परीक्षण करने के लिए तैयार किया जा रहा है। लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी सिर्फ 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए मंजूरी नहीं मिल पाने के कारण पूरा प्रोजेक्ट अधर में लटक गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह ट्रैक गुढ़ा (नवल के पास) से मीठड़ी(सांभर झील क्षेत्र )तक प्रस्तावित है और इसका अधिकांश हिस्सा तैयार हो चुका है। लेकिन यह ट्रैक सांभर झील क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां 2.5 किमी का हिस्सा वेटलैंड क्षेत्र में आता है।
- इस हिस्से के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से अनुमति नहीं मिल पाई है।
- राज्य वेटलैंड अथॉरिटी का तर्क है कि सांभर झील अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट है, जहां निर्माण कार्य प्रतिबंधित है।
- जबकि रेलवे का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले से नमक परिवहन की पटरियां और मुख्य जयपुर-जोधपुर रेलवे लाइन मौजूद हैं।
- इस देरी की वजह से कई तकनीकी कार्य जैसे परीक्षण और ट्रैकिंग सिस्टम की सेटिंग अटकी हुई हैं।
- जब तक यह 2.5 किमी वाला भाग पूरा नहीं होता, ट्रैक चालू नहीं हो सकता।
- रेलवे का मानना है कि यह ट्रैक भविष्य में बुलेट ट्रेन कोचों, नए इंजनों और वॉगनों के परीक्षण के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि चीन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऐसे हाई-स्पीड ट्रैक आम हैं।
भारत में फिलहाल ऐसे परीक्षणों के लिए नियमित ट्रैफिक रोकना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते हैं।
रेलवे अब एक बार फिर से राज्य सरकार और मंत्रालय के पास नई याचिका भेजने की तैयारी कर रहा है, ताकि दिसंबर की समयसीमा को किसी तरह पूरा किया जा सके।






