झुंझुनूं रोडवेज़ डिपो में खड़ी पुरानी बसें और यात्री इंतजार करते हुए।

झुंझुनूं रोडवेज़ डिपो को नहीं मिली एक भी नई बस, यात्रियों और कर्मचारियों में नाराज़गी

झुंझुनूं रोडवेज़ डिपो को 31 बसों की मांग के बावजूद एक भी नई बस नहीं मिली। पुराने वाहनों के सहारे चल रही सेवा से यात्रियों और कर्मचारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

झुंझुनूं जिले के यात्रियों के लिए निराशाजनक खबर आई है। राजस्थान रोडवेज़ के लिए हाल ही में 288 नई बसें खरीदी गईं, लेकिन झुंझुनूं रोडवेज़ डिपो को इनमें से एक भी बस नहीं दी गई। इस फैसले से यात्रियों और कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है।


कुल नई बसेंझुंझुनूं की मांगप्राप्त
288310

डिपो प्रशासन ने प्रदेश स्तर पर कुल 31 नई बसों की मांग की थी, क्योंकि मौजूदा बसों की हालत काफी खराब है। कई बसें 10–12 साल पुरानी हैं और लगातार मरम्मत की वजह से न केवल खर्च बढ़ रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।

यात्रियों को अक्सर बीच रास्ते में बस खराब होने की समस्या झेलनी पड़ती है। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को समय पर गंतव्य तक न पहुंच पाने की शिकायत रहती है। इसके बावजूद झुंझुनूं डिपो को नई बसों की सूची से बाहर कर दिया गया।


स्थानीय यात्रियों ने कहा कि झुंझुनूं जैसे बड़े जिले को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। सुबह-शाम रोडवेज़ स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन बसों की कमी के कारण लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

छात्रों ने भी नाराज़गी जताई कि पुरानी बसें अक्सर बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं जिससे परीक्षा या इंटरव्यू में देर हो जाती है।


रोडवेज़ कर्मचारियों ने बताया कि पुरानी बसों को चलाने और उनकी मरम्मत कराने में लगातार दिक्कत आती है। कई बार तकनीकी खराबी की वजह से लंबी दूरी की यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ती है।


परिवहन सेवाएँ किसी भी जिले की रीढ़ मानी जाती हैं। बसों की कमी सीधे तौर पर शिक्षा, रोजगार और व्यापार पर असर डालती है। झुंझुनूं डिपो को नई बसें न मिलने से यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जिले की जरूरतों को क्यों नजरअंदाज किया गया।


झुंझुनूं रोडवेज़ डिपो को नई बसें न मिल पाने से यात्रियों की उम्मीदें टूटी हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को जल्द ही इस मुद्दे पर ध्यान देकर जिले के लिए नई बसें उपलब्ध करानी चाहिए।

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