झुंझुनूं | 06 नवंबर 2025, 10:30 AM IST
भारत ने भविष्य की 6G टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि देशभर में 100 5G लैब्स स्थापित की जा चुकी हैं, जिनका लक्ष्य देश को 6G तकनीक में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करना है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम | Emerging Science, Technology & Innovation Conclave (ESTIC 2025), भारत मंडपम नई दिल्ली |
| घोषणा | देशभर में 100 5G लैब्स की स्थापना, 6G रिसर्च और इनोवेशन के लिए |
| नेतृत्व | डॉ. नीरज मित्तल (सचिव, टेलीकॉम विभाग और अध्यक्ष, डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन) |
| वैश्विक लक्ष्य | 2030 तक वैश्विक 6G पेटेंट्स में भारत का 10% योगदान |
| फोकस एरिया | AI-आधारित नेटवर्क, स्वदेशी चिपसेट, Open RAN और रिसर्च कोलैबोरेशन |
5G रोलआउट में भारत सबसे तेज
डॉ. मित्तल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के कारण भारत ने दुनिया में सबसे तेज 5G रोलआउट किया है।
उन्होंने बताया कि अब तक 100 से अधिक 5G लैब्स देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित की जा चुकी हैं। इन लैब्स के जरिए स्थानीय उद्यमों और स्टार्ट-अप्स को यूज-केस डेवलपमेंट का मौका मिलेगा और 6G तकनीक के लिए भारत की तैयारी तेज़ होगी।
कनेक्टिविटी से आर्थिक विकास तक
मित्तल ने कहा कि अब दूरसंचार केवल एक सेवा नहीं बल्कि आर्थिक विकास की रीढ़ बन चुकी है।
“कनेक्टिविटी हर उत्पादक गतिविधि की नींव है। भारत की टेलीकॉम क्रांति ने देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है।”
भारत 6G एलायंस से वैश्विक साझेदारी
‘भारत 6G एलायंस’ के तहत भारत ने अब तक 10 अंतरराष्ट्रीय सहयोग समझौते (MoUs) किए हैं।
इनका लक्ष्य 2030 तक दुनिया भर में दर्ज होने वाले 6G पेटेंट्स में भारत का कम से कम 10% योगदान सुनिश्चित करना है।
यह एलायंस प्रधानमंत्री मोदी के ‘डिजिटल इंडिया से ग्लोबल डिजिटल लीडरशिप’ विजन को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।
AI और स्वदेशी तकनीक पर फोकस
सरकार ने 100 से अधिक 6G R&D प्रोजेक्ट्स को वित्तीय समर्थन दिया है।
इनमें स्वदेशी चिपसेट विकास, AI-बेस्ड नेटवर्क इंटेलिजेंस, और भविष्य-उन्मुख कम्युनिकेशन सॉल्यूशंस शामिल हैं।
इससे शिक्षा संस्थान, उद्योग और सरकार के बीच एक मजबूत साझेदारी सुनिश्चित हो रही है।
भारत का 6G लक्ष्य
भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और इनवेटर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि 5G और 6G तकनीक के युग में भारत सिर्फ फॉलोअर न रहे बल्कि ग्लोबल पायनियर बने।
- डिजिटल इकोसिस्टम की तेज़ विकास दर: 5G-लैब्स इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बूस्ट करेंगी।
- रोजगार के नए अवसर: AI और नेटवर्किंग से जुड़ी नई कौशल की मांग बढ़ेगी।
- आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य: स्वदेशी चिपसेट और नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर से विदेशी निर्भरता कम होगी।
- वैश्विक लीडरशिप: 6G मानकों (standards) में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।
भारत का 6G विजन केवल तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व रखता है।
2030 तक यदि भारत 10% 6G पेटेंट्स का योगदान दे पाता है, तो यह देश को ग्लोबल इननोवेशन मैप पर शीर्ष पर ला सकता है।
यह कदम देश को टेक्नोलॉजी के सिर्फ यूज़र से डेवलपर-नेशन बनाने की दिशा में ले जाएगा।






