देशभक्ति की कोई उम्र नहीं होती — इसका जीवंत उदाहरण है 10 वर्षीय श्रवण सिंह, जो पंजाब के फिरोजपुर जिले में “ऑपरेशन सिंदूर“ के दौरान सैनिकों के लिए खुद चाय, लस्सी और खाने का इंतज़ाम करता रहा।
श्रवण, जो इस समय चौथी कक्षा में पढ़ रहा है, ने मई 2025 में बॉर्डर पर तैनात जवानों को बिना किसी को कहे पानी, भोजन और पेय पदार्थ पहुंचाना शुरू किया था। उसका मासूम लेकिन प्रेरणादायक सेवा भाव सैनिकों के दिल को छू गया।
भारतीय सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने इस हिम्मती बच्चे के जज़्बे को सलाम करते हुए घोषणा की है कि वह श्रवण की पूरी शिक्षा का खर्च उठाएगी।देशभक्ति की ऐसी भावना विरले ही देखने को मिलती है। श्रवण ने जो किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।
श्रवण के पिता एक छोटे किसान हैं और मां गृहिणी। वे कहते हैं कि उन्हें पता ही नहीं था कि बेटा रोज़ खुद से थर्मस और गिलास लेकर बॉर्डर पोस्ट पर जा रहा है।हमने कभी नहीं सोचा था कि सेना उसकी इतनी सराहना करेगी। आज हमें गर्व महसूस हो रहा है।






