ऑपरेशन सिंदूर ने बदल दिया युद्ध का चेहरा
पाकिस्तान के सैकड़ों आर्म्ड और अनआर्म्ड ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन, ऑपरेशन सिंदूर में झोंक दिए गए — लेकिन भारतीय सेना ने उन्हें काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक तरीकों से पूरी तरह नाकाम कर दिया।
पूरी जंग ड्रोन बनाम एंटी ड्रोन बन गई — और भारत इस नई टेक्नोलॉजिकल लड़ाई में पूरी तरह तैयार था। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने साफ कहा कि “कल के हथियार आज की जंग नहीं जीत सकते — हमें भविष्य की तकनीक से लैस होना ही होगा।”
लॉजिस्टिक ड्रोन: अब सप्लाई की लड़ाई हवा से
अब सेना की नजर है लॉजिस्टिक ड्रोन पर — यानी ऐसे ड्रोन जो हाई ऑल्टिट्यूड वाले बर्फीले पोस्ट्स तक राशन, दवाएं, गोला-बारूद और जरूरी सामान पहुंचा सकें।
अब भारतीय सेना की लॉजिस्टिक ताकत बनेगा “ड्रोन सबल 20”
2022 में जारी RFP के अनुसार, सेना को चाहिए थे:
- 163 हाई ऑल्टिट्यूड ड्रोन (50–80 किलो भार वहन की क्षमता)
- 200 मीडियम ऑल्टिट्यूड ड्रोन (20–25 किलो भार)
अब इनमें से “सबल-20” नामक मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन सेना में शामिल हो चुका है।
इसकी खासियतें:
- 20 से 25 किलो तक सामान ले जाने की क्षमता
- VTOL टेक्नोलॉजी — यानी वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग
- खराब मौसम में भी संचालन संभव
- दुर्गम पोस्टों तक सटीक डिलीवरी
चीन से सीख, भारत की तेज़ तैयारी
चीन पहले ही अपने ड्रोन से ऊंचाई वाले इलाकों में सप्लाई कर रहा है। भारत ने इस चुनौती को पहचानते हुए तेजी से स्वदेशी लॉजिस्टिक ड्रोन विकसित करने पर काम शुरू किया।
अगले 5 वर्षों में सेना को 80 किलो भार वहन करने वाले हाई ऑल्टिट्यूड ड्रोन मिलने की उम्मीद है।
क्यों ज़रूरी है लॉजिस्टिक ड्रोन?
- आपात स्थिति में सैनिक तक तात्कालिक दवाइयां भेजना
- भारी बर्फबारी में भी सप्लाई बाधित न हो
- मौसम और जोखिम से स्वतंत्र
- पोर्टर निर्भरता कम होगी
- सटीक और तेज़ डिलीवरी
ऑपरेशन सिंदूर से सबक — अब जंग हवा में जीती जाती है
जिस तरह कारगिल युद्ध में भारतीय तोपखाने ने दुश्मन को पस्त किया था, उसी तरह ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय ड्रोन और ब्रह्मोस ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया।
72 घंटों में पाकिस्तान को अमेरिका से सीज़फायर की गुहार लगानी पड़ी — वरना उनकी पूरी सैन्य संरचना खत्म होने की कगार पर थी।
भारत का भविष्य — आत्मनिर्भर सैन्य तकनीक और तेज़ लॉजिस्टिक सपोर्ट
लॉजिस्टिक ड्रोन भारत की अगली युद्ध रणनीति का हिस्सा हैं।
अब ज़रूरत है:
- हाई ऑल्टिट्यूड भारवाहक ड्रोन का निर्माण
- AI-आधारित नेविगेशन और ऑटो-पायलट तकनीक
- तेज़ और स्वदेशी सप्लाई चैन ऑप्टिमाइज़ेशन



